120 परिवारों की आवाजाही प्रभावित, प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कर सुरक्षित यातायात बहाल करने के निर्देश–
गोपेश्वर। दशोली विकासखंड के ग्राम खैनुरी को जोड़ने वाली आपदा प्रभावित मोटर सड़क के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार को तहसील प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने क्षतिग्रस्त सड़क का स्थलीय निरीक्षण कर जल्द मरम्मत के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।
प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष योगिता रावत ने रविवार और सोमवार को मुख्यमंत्री से दूरभाष पर बातचीत कर खैनुरी मोटर मार्ग की बदहाल स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लगभग नौ किलोमीटर लंबी यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है, लेकिन लंबे समय से भूस्खलन और भूधंसाव के कारण इसकी स्थिति बेहद खराब है। सड़क क्षतिग्रस्त होने से करीब 120 परिवारों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों को जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी चमोली और संबंधित विभागों को सड़क की प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, विद्युत सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की बहाली में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार ने तहसील प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम को चमोली-खैनुरी मोटर मार्ग के निरीक्षण के लिए भेजा। टीम ने भूस्खलन प्रभावित स्थलों, क्षतिग्रस्त हिस्सों और जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सड़क पर जमा मलबा तत्काल हटाने, नालियों की सफाई एवं निर्माण कराने तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने की संस्तुति की गई।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र पूरा कर मार्ग पर सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संवेदनशील सड़कों की लगातार निगरानी की जा रही है और जनसुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष योगिता रावत ने मुख्यमंत्री के त्वरित संज्ञान पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क की मरम्मत होने से ग्रामीणों को अब जान जोखिम में डालकर आवागमन नहीं करना पड़ेगा।

