एसटीपी की नियमित निगरानी और ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के निर्देश–
गोपेश्वर, 28 सितंबर 2026: विकास भवन सभागार गोपेश्वर में सोमवार को जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जनपद में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत संचालित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में जनपद में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थिति की समीक्षा करते हुए नियमित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनपद में कुल 26 एसटीपी संचालित हैं, जिनमें 16 सरकारी एवं 10 निजी एसटीपी शामिल हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी एसटीपी के सैंपल एक ही दिन में लिए जाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से संयुक्त रूप से सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए, ताकि एसटीपी के संचालन एवं उपचारित जल की गुणवत्ता का समग्र मूल्यांकन किया जा सके।
सीवरेज एवं सेप्टेज मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान हेमकुंड क्षेत्र में कार्यों में तेजी लाने तथा आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही माणा एवं बामणी गांवों के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु कंसल्टेंसी की कार्रवाई शीघ्र पूरी करने को कहा गया।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अगस्त माह में जनपद की 11 नगर निकायों में कुल 660 टन ठोस अपशिष्ट का निस्तारण किया गया। इसमें 330 टन सूखा तथा 329 टन गीला कूड़ा शामिल है। वहीं जनपद के 68 वार्डों में 24,594 आवासीय एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों/परिवारों से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण किया जा रहा है।
गीले कूड़े के प्रसंस्करण एवं प्रबंधन से नगर निकायों द्वारा ₹25,450 की आय अर्जित की गई है। मुख्य विकास अधिकारी ने ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने तथा कूड़ा पृथक्करण एवं नियमित संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने एंटी-लिटरिंग के तहत चालानी कार्रवाई बढ़ाने तथा सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फैलाने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर उनके द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विशेष रूप से गंगा ग्रामों में ठोस अपशिष्ट का अनिवार्य रूप से संग्रहण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में किसी भी प्रकार का ठोस अपशिष्ट, सीवेज अथवा सेप्टेज सीधे प्रवाहित न हो और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए।
बैठक में एसडीओ वन विकास सिंह, अधिशासी अभियंता जल संस्थान संजय कुमार, अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

